विख्यात शायर गोविंद ‘गुलशन’ का निधन, साहित्य जगत में शौक की लहर

विख्यात शायर गोविंद ‘गुलशन’ का निधन, साहित्य जगत में शौक की लहर


हलचल इंडिया लाइव न्यूज़ 
ब्यूरो रिपोर्ट
गाजियाबाद:- उर्दू ग़ज़ल के विश्वविख्यात शायर गोविंद ‘गुलशन’ के निधन से साहित्य जगत में शौक की लहर है। देश-विदेश के साहित्यकारों ने उनके निधन को साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति बताया।  शायर गोविंद ष्गुलशनष् का 1 जनवरी को निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक निवास अनूपशहर ;बुलंदशहर में बड़ी संख्या में मौजूद शायरों, साहित्य प्रेमियों और शुभचिंतकों की मौजूदगी में किया गया था। विश्व विख्यात शायर असलम राशिद ने कहा कि गोविंद गुलशन ने अपनी पूरी ज़िंदगी ग़ज़ल को सौंप दी थी। उनके घर का नाम भी ग़ज़ल ही था। उनक जाने से उर्दू अदब की क्षति हुई है उसे भर पाना नामुमकिन है। शायर अज़हर इक़बाल ने कहा कि जिस शायर ने शायरी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया हम सब उन्हें गोविंद गुलशन के नाम से जानते हैं। अपने गुरु कृष्ण बिहारी नूर साहब की साहित्यक परंपरा का निर्वहन करते हुए गोविंद गुलशन साहब ने धर्म से ऊपर उठकर मानवता की भलाई के लिए भाषा को एक पुल की तरह इस्तेमाल किया और लोगों को अपनी शायरी के ज़रिए एक दूसरे के क़रीब ले कर आए। उनके जाने से साहित्य जगत में एक ऐसी रिक्ति पैदा हुई है जिसका भरना मुश्किल होगा। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ चेतन आंनद ने कहा कि गोविंद गुलशन ने अपनी शायरी से न केवल प्रदेश बल्कि देश.विदेश में ग़ाज़ियाबाद का नाम रोशन किया। उनकी ग़ज़लों और नज़्मों में जीवन का यथार्थ, सामाजिक सरोकार, प्रेम, पीड़ा और मानवीय संवेदनाएँ अत्यंत सजीव रूप में अभिव्यक्त होती थीं। वे शब्दों के ऐसे साधक थे, जिनकी रचनाएँ सीधे दिल से निकलकर दिल तक पहुँचती थीं। उनका आकस्मिक निधन साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। विश्व वि,यात कवियत्री डॉ रमा सिंह ने कहा कि गोविन्द गुलशन जी एक बेहतरीन शायर ही नहीं बेहतरीन इंसान थे। नूर साहब से ग़ज़ल की कहन को केवल आत्मसात ही नहीं किया, बल्कि उन्होंने नए ग़ज़लकारों को वे सभी बारीकियाँ दी जो उन्होंने अपने गुरुजी से सीखी थीं। जीवन संघर्ष में  बीता पर, जीवटता अद्भुत रही। उनकी शायरी उनकी जिन्दगी की बयानी है। गुलशन जी के गुलों की खुशबू उनके चाहने वाले निरन्तर महसूस कर रहे हैं और करते रहेंगे। वरिष्ठ शायरा डॉ माला कपूर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त शायर व मेरे गुरुवर गोविंद गुलशन का शायरी के क्षेत्र में साहित्यिक योगदान अतुलनीय है। उनकी साधना, सृजन और संवेदनशील अभिव्यक्ति ने उन्हें एक विशिष्ट और अप्रतिम स्थान दिलाया, जो सदैव स्मरणीय रहेगा। उनका असमय देहावसान उनके परिवार, शिष्यों और समस्त साहित्यप्रेमियों के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं हो पाएगी। उनकी स्मृति, विचार और साहित्यिक विरासत हमें सदा प्रेरित करती रहेगी।

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