यूजीसी गाइलाइन के समर्थन में जाटों का क्लियर स्टैंडदिल्ली सेमिनार तय करेगा नया सामाजिक समीकरण
यूजीसी गाइलाइन के समर्थन में जाटों का क्लियर स्टैंड
दिल्ली सेमिनार तय करेगा नया सामाजिक समीकरण
हलचल इंडिया लाइव न्यूज़ ब्यूरो रिपोर्ट
न्यू दिल्ली -- 24 मार्च को नई दिल्ली के ग़ालिब इंस्टिट्यूट में आयोजित होने वाले यूजीसी के समर्थन वाले सेमिनार पर सबकी निगाहेँ टिकी हैं. यूजीसी गाइड लाइन को लेकर पूरे देश में जाटो का क्लियर स्टैंड साफ दिखने लगा है. 24 मार्च को देश भर से जाट बुद्धिजीवी, पत्रकार, सामाजिक राजनितिक कार्यकर्ता, वकील, शिक्षक व युवा सेमिनार में भाग लेंगे. जाहिर है कि ज़ब सेमिनार यूजीसी गाइड लाइन के समर्थन में हो रहा है तो गाइड लाइन के समर्थक लोग ही उसमे हिस्सा लेंगे. दीन बंधु सर छोटूराम औऱ चौ. चरण सिंह के बाद जाटों का यह पहला वैचारिक सेमिनार हो रहा है. हालांकि यूजीसी की गाइड लाइन से जाट उतना प्रभावित नहीं है लेकिन अति पिछड़ा, दलित औऱ मुसलमान पर इसका सौ प्रतिशत प्रभाव पड़ने वाला है. यूजीसी गाइड लाइन ने चूंकि पूरे देश को अगड़े औऱ दलित पिछड़े में बाँट दिया है. ऐसे में सवाल यह है कि जाट किस तरफ जाए. जाट कौम को अपर कास्ट समय समय पर अपने हिसाब से परिभाषित करता रहा है. कभी उसे क्षत्रिय कह दिया जाता है तो कभी पिछड़ा औऱ शूद्र. चौ. छोटूराम हमेशा कहा करते थे कि ए मेरे भोले जाट, तू मेरी दो बात ले मान. बोलना ले सीख औऱ दुश्मन ले पहचान. लेकिन चौ. चरण सिंह, कुम्भा राम आर्य औऱ चौ. देवीलाल के जाने के बाद छोटूराम की इस नसीहत को जाटों ने दरकिनार कर दिया औऱ दुश्मन की खाट की पायतन का हिस्सा बन गया जबकि उसे पिछड़े, दलित औऱ मुसलमान अपनी खाट के सिरहाने बैठाने को तैयार थे. यहीँ से जाट का राजनितिक औऱ सामाजिक पतन शुरू हुआ औऱ आज जाट चौराहे पर खड़ा है. 2014 में बड़े आंदोलन के बाद मिला उसका पिछड़े वर्ग का आरक्षण सुप्रीम कोर्ट के जरिये छीन लिया गया औऱ देश की मुख्य धारा में आने के उसके रास्ते रोक दिए. दिल्ली सेमिनार के जरिये यूजीसी का समर्थन करके जाट समाज दलितों, पिछडो औऱ मुसलमानो के साथ खड़ा होता दिखना चाहता है. इसलिए वैचारिक रूप से इस सेमिनार का महत्व बहुत ही जबरदस्त है. जिस तरह से सेमिनार को लेकर प्रतिक्रियाए आ रही हैं उससे समाज में एक सकारात्मक सोच बनती दिख रही है. लोग आयोजको के प्रयास की भी सराहना कर रहे हैं. यूनिवर्सल जाट मिशन के कोर टीम के सदस्य अदित चौधरी ने बताया कि 11-12 राज्यों में उनकी टीम ने सम्पर्क करके लोगों को आमंत्रित किया है. उन्होंने बताया कि यह पहला अवसर है जब जाट समाज बौद्धिक स्तर पर इकट्ठा होगा.
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