त्याग और तप की प्रतिमूर्ति महान स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर जी को! मातृभूमि की सेवा में समर्पित उनका जीवन देशवासियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा:-बीके शर्मा हनुमान

त्याग और तप की प्रतिमूर्ति महान स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर जी को! मातृभूमि की सेवा में समर्पित उनका जीवन देशवासियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा:-बीके शर्मा हनुमान'
  

हलचल इंडिया लाइव न्यूज़ ब्यूरो रिपोर्ट

गाज़ियाबाद :- हरविलास फाउंडेशन के तत्वाधान में वीर सावर जी की पुण्यतिथि मनाई विश्व ब्रह्मऋषि ब्राह्मण महासभा के पीठाधीश्वर ब्रह्मऋषि विभूति बी के शर्मा हनुमान ने सावरकर को 'त्याग और तप की प्रतिमूर्ति' बताया। 'मातृभूमि की सेवा में समर्पित उनका जीवन देशवासियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा।' हर विलास गुप्ता जी के सुपुत्र राजीव मोहन रवी मोहन ने संयुक्त बयान में बताया कि भारतीय राजनीति की विवादित हस्तियों में शुमार सावरकर पर राजनीतिक दलों से लेकर लोगों की राय भी बंटी हुई है। रत्‍नागिरि में पैदा हुए सावरकर की पहचान हिंदू राष्‍ट्रवादी विचारधारा के जनक के रूप में होती है। हिंदू महासभा में शामिल होकर सावरकर ने 'हिंदुत्‍व' को लोकप्रिय बनाया। भारत की एक हिंदू राष्‍ट्र के रूप में परिकल्‍पना का भी सावरकर ने समर्थन किया। परमार्थ समिति के अध्यक्ष वीके अग्रवाल ने कहा कि सावरकर ने 26 फरवरी, 1966 को बॉम्‍बे में अंतिम सांस ली 28 मई, 1883 को एक मराठी ब्राह्मण परिवार में जन्मे सावरकर हिंदू राष्ट्र और अखंड भारत के अपने नजरिए के लिए जाने जाते हैं। भारत छोड़ो आंदोलन और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सावरकर हिंदू महासभा के अध्यक्ष थे। वर्ष 1937 से 1942 तक वीर सावरकर अखिल भारत हिंदू महासभा के 15वें राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे थे। राजनेता और लेखक, सावरकर का नाम भारत छोड़ो आंदोलन का खुलकर विरोध करने के कारण उनके निधन के पांच दशक बाद भी विवाद खड़ा करता है। उन्हें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सेलुलर जेल में सजा काटने के लिए भी जाना जाता है। इस अवसर पर सुनील शर्मा अखिलेश अग्रवाल हेमंत कैंसिल श्याम सुंदर राकेश मित्तल अशोक गोयल आदि मौजूद थे

Comments

Popular posts from this blog

यूजीसी गाइलाइन के समर्थन में जाटों का क्लियर स्टैंडदिल्ली सेमिनार तय करेगा नया सामाजिक समीकरण

श्याम सेवा परिवार गाजियाबाद ट्रस्ट (रजि.) प्रेस वार्ता एवं भूमि पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया

विख्यात शायर गोविंद ‘गुलशन’ का निधन, साहित्य जगत में शौक की लहर