बद्रीनाथ धाम में शहर विधायक संजीव शर्मा द्वारा आयोजित भागवत कथा के अंतिम दिन राजा परीक्षित को मोक्ष मिलने के प्रसंग ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया

भागवत कथा ऐसा अमृत है, जिसका रसास्वादन करने को देवता भी तरसते हैंः कथा व्यास अभिषेक भाई
बद्रीनाथ धाम में शहर विधायक संजीव शर्मा द्वारा आयोजित भागवत कथा के अंतिम दिन राजा परीक्षित को मोक्ष मिलने के प्रसंग ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया
शहर विधायक संजीव शर्मा व उनकी पत्नी ऋतु शर्मा एवं आशीष और रूबी अग्रवाल ने विश्व कल्याण की कामना से हवन में आहुति दी
हवन के बाद भंडारे में हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया 
हलचल इंडिया लाइव न्यूज़ 
 रिपोर्ट:- विकास कुमार 


बद्रीनाथ धामः- शहर विधायक संजीव शर्मा व उनकी पत्नी ऋतु शर्मा एवं आशीष और रूबी अग्रवाल द्वारा शिव बद्रिका धाम बद्रीनाथ में आयोजित श्रीमद भागवत कथा ने शनिवार को विश्राम लिया। कथा व्यास अभिषेक भाई जी बालाजी धाम आश्रम आगरा ने अंतिम दिन राजा परीक्षित को भागवत कथा श्रवण करने से मोक्ष प्राप्त होने के प्रसंग का वर्णन कर भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। कथा के बाद हवन का आयोजन हुआ जिसमें शहर विधायक संजीव शर्मा व उनकी पत्नी ऋतु शर्मा एवं आशीष और रूबी अग्रवाल ने विश्व कल्याण व सभी के सुख-समृद्धि की कामना से आहुति दी। हवन के बाद भंडारे में हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। कथा व्यास अभिषेक भाई ने राजा परीक्षित मोक्ष प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि एक बार परीक्षित महाराज वनों में काफी दूर चले गए। उनको प्यास लगी तो समीक ऋषि के आश्रम में पहुंचे और उनसे पानी पिलाने को कहा समाधि में लीन होने के कारण समीक ऋषि ने उनकी बात नहीं सुनी। कलियुग के प्रभाव में। आकर राजा परीक्षित ने इसे अपमान मानकर मरा हुआ सर्प उठाकर समीक ऋषि के गले में डाल दिया।
समीक ऋषि के पुत्र को इसका पता चला तो उन्होंने राजा परीक्षित को सात दिन के अंदर तक्षक नाग के डसने से मौत हो जाने का श्राप दे दिया। समीक ऋषि को जब यह पता चला तो उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा कि यह तो महान धर्मात्मा राजा परीक्षित है और यह अपराध इन्होंने कलियुग के वशीभूत होकर किया है। उन्होंने राजा परीक्षित को सातवें दिन मौत हो जाने के श्राप के बारे में बताया तो वे अपना राज्य अपने पुत्र जन्मेजय को सौंपकर गंगा नदी के तट पर पहुंचे। वहां पर बड़े बड़े ऋषिए मुनि देवता आ पहुंचे और अंत मे व्यास नंदन शुकदेव आए। शुकदेव जी ने उन्हें सात दिन तक भागवत कथा का श्रवण कराया जिससे उनके अंदर मौत का कोई भय नहीं रहा और वे मोक्ष को प्राप्त हुए। शुकदेव जी द्वारा राजा परीक्षित को सात दिन तक भागवत कथा श्रवण कराने के बाद से ही सात दिवसीय भागवत कथा की परम्परा शुरू हुई है। भागवत कथा ऐसा अमृत है, जिसका पान करने के लिए देवता भी तरसते हैं। शहर विधायक संजीव शर्मा ने सभी भक्तों खासकर गाजियाबाद से उनके साथ आए 200 भक्तों का विशेष आभार व्यक्त किया और कहा कि बद्रीनाथ धाम जहां साक्षात बद्री विशाल भगवान विराजते हैं, वहां पर उन्हें भागवत कथा के आयोजन कराने का सौभाग्य भगवान की कृपा से ही मिला है। बद्रीनाथ धाम में भागवत कथा के श्रवण करने से जो आनंद व सुख की अनुभूति हुई, उसका वर्णन नहीं किया जा सकता है।
                  

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